
वापी की सड़कें बनीं जानलेवा बीच में ऊँची, किनारों से धँसीं सड़कें — ज़रा सी चूक और हादसा तय
सालासर मिशन वापी वलसाड़
रिपोर्ट : विनय प्रजापति वापी।
शहर की सड़कों की हालत अब सिर्फ बदहाल नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जानलेवा बन चुकी है। वापी की अधिकांश सड़कों का निर्माण इस तरह किया गया है कि सड़क का बीच का हिस्सा असामान्य रूप से ऊँचा है, जबकि दोनों किनारे नीचे धँसे हुए हैं। ऐसे में किसी भी वाहन का संतुलन बिगड़ना तय है। चारपहिया वाहन कभी भी पलट सकते हैं और दोपहिया वाहन फिसलकर हादसे का शिकार हो रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सड़कें सुविधा के लिए नहीं, बल्कि मौत को न्योता देने के लिए बनाई गई प्रतीत होती हैं।आए दिन हो रहे हादसे, फिर भी जिम्मेदार मौन शहर में रोज़ाना छोटे-बड़े सड़क हादसे हो रहे हैं। बाइक सवार असंतुलित होकर गिर रहे हैं, ऑटो और कारें ढलान के कारण पलटने की स्थिति में आ जाती हैं। इसके बावजूद न तो सड़क की डिजाइन बदली जा रही है और न ही जिम्मेदार विभाग कोई ठोस कदम उठा रहे हैं।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि काम पूरा होने के बाद भी इन सड़कों को पास कर दिया गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।तकनीकी नियमों की अनदेखी सड़क निर्माण के मानकों के अनुसार सड़क का लेवल ऐसा होना चाहिए जिससे वाहन सुरक्षित रूप से चल सकें। लेकिन वापी में बनी सड़कों में न तो सही लेवलिंग दिखाई देती है और न ही संतुलन। बीच में उभरी सड़क और किनारों की ढलान साफ तौर पर तकनीकी खामी और लापरवाही की ओर इशारा करती है।ठेकेदार से लेकर अधिकारी तक सवालों के घेरे में अगर सड़क निर्माण में खामी है, तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ ठेकेदार तक सीमित नहीं हो सकती।निर्माण करने वाले ठेकेदार,डिजाइन और निगरानी करने वाले इंजीनियर,और काम पूरा होने के बाद सड़क को पास करने वाले अधिकारी —तीनों की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि घटिया काम के बावजूद भुगतान कर दिया जाता है, और बाद में हादसों का ठीकरा जनता के सिर फोड़ दिया जाता है।विकास के नाम पर समझौता?औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले वापी से सरकार को भारी राजस्व मिलता है, लेकिन बुनियादी सुविधा यानी सड़कें ही अगर लोगों की जान के लिए खतरा बन जाएं, तो यह विकास नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी।अब उठ रहे हैं ये सवाल सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच किसने की?क्या किसी इंजीनियर या अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?हादसों की जिम्मेदारी कौन लेगा?क्या प्रशासन हादसे का इंतजार कर रहा है?जनता की मांग स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सभी सड़कों का तत्काल तकनीकी ऑडिट कराया जाए, दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में सड़क निर्माण में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन हो।जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक वापी की सड़कें सवाल पूछती रहेंगी—ये सड़कें सुविधा के लिए हैं या फिर मौत को न्योता देने के लिए?
