फार्मा लैब की आड़ में नशे का कारखाना!सूरत में MD ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा — गुजरात सरकार के ‘ड्रग्स-फ्री’ दावे कटघरे में

सालासर मिशन | सूरत

विशेष रिपोर्ट : विनय प्रजापति

दिनांक : 07/01/2026

गुजरात को नशामुक्त राज्य बताने वाले सरकारी दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर बेनकाब हो गई है। सूरत के पर्वत पाटिया क्षेत्र स्थित सोलारिस शॉपिंग सेंटर से SOG द्वारा पकड़ी गई MD ड्रग्स निर्माण की अवैध प्रयोगशाला ने पूरे शासन-प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह नशे की फैक्ट्री किसी अंधेरी गली में नहीं, बल्कि डिक्रिया फूड एंड फार्मा एनालिटिकल लैबोरेटरी के नाम से, खुलेआम चल रही थी। यानी जहां दवाओं की जांच होनी चाहिए थी, वहीं से युवाओं के लिए नशे का ज़हर तैयार किया जा रहा था।प्रशासन सोता रहा, नशा फलता रहा तीन युवक लंबे समय से इसी लैब में क्रिस्टल बेस्ड MD ड्रग्स बनाकर शहर में सप्लाई कर रहे थे। सवाल यह है कि शॉपिंग सेंटर में चल रही इस लैब पर कभी निरीक्षण क्यों नहीं हुआ?ड्रग कंट्रोल विभाग, फूड एंड ड्रग्स प्रशासन और स्थानीय पुलिस क्या कर रही थी?केमिकल्स की भारी मात्रा की खरीद पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी?क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर सिस्टम की मिलीभगत?2.92 लाख का मुद्दे माल और कई अनकहे सच SOG ने छापेमारी के दौरान ड्रग्स बनाने में प्रयुक्त केमिकल्स सहित करीब 2.92 लाख रुपये का मुद्दे माल जब्त किया है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह असली कारोबार का पूरा आंकड़ा है या सिर्फ ऊपरी परत?सूत्रों के अनुसार, पहले पकड़े गए आरोपी जील भूपत ठुम्मर से पूछताछ के बाद ही इस फैक्ट्री तक पुलिस पहुंच सकी। यानी जब तक आरोपी हाथ नहीं लगा, तब तक प्रशासन को कोई खबर नहीं थी।युवाओं की बर्बादी पर कौन जिम्मेदार?MD ड्रग्स आज गुजरात के युवाओं को तेजी से खोखला कर रही है। सरकार मंचों से नशे के खिलाफ भाषण देती है, लेकिन हकीकत यह है कि नशा अब शहरों के बीचों-बीच फैक्ट्रियों में बन रहा है।क्या यह सरकार की नाकामी नहीं कि:नशे की फैक्ट्री शॉपिंग सेंटर में चलती रही फार्मा लैब का नाम लेकर ड्रग्स बनाए जाते रहे और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा?गुजरात सरकार से ‘सालासर मिशन’ के तीखे सवाल अब जनता जवाब चाहती है:क्या सिर्फ तीन युवकों को पकड़कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच जाएगी?संबंधित अधिकारियों पर कब और क्या कार्रवाई होगी?राज्य में चल रही अन्य फार्मा लैब्स की विशेष जांच कब होगी?ड्रग्स माफिया की जड़ों तक पहुंचने की इच्छाशक्ति सरकार में है या नहीं?SOG की कार्रवाई सराहनीय, लेकिन काफी नहीं SOG की इस कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को उजागर किया है, लेकिन यह कार्रवाई प्रशासनिक विफलता का प्रमाण भी है। अगर समय रहते निगरानी होती, तो सूरत के युवाओं तक यह नशा पहुंचने से पहले ही रुक सकता था।अब देखना यह है कि गुजरात सरकार इस मामले को सिर्फ एक पुलिस केस बनाकर फाइलों में दफना देती है या फिर व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कर मिसाल कायम करती है।सवाल सीधा है —नशा पकड़ा गया, लेकिन क्या सिस्टम भी पकड़ा जाएगा?

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