अंकिता भंडारी हत्याकांड : एक ‘ना’ की सज़ा, सिस्टम की चुप्पी और अधूरा सच

सालासर मिशन ब्यूरो | उत्तराखंड

सिर्फ हत्या नहीं थीउत्तराखंड की पहाड़ियों में गूंजा अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक युवती की हत्या का मामला नहीं, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिंब है जहाँ सत्ता, पैसा और रसूख के आगे एक आम लड़की की “ना” बर्दाश्त नहीं की गई।यह रिपोर्ट केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परत-दर-परत जाँच है — जिसमें सवाल भी हैं, सबूत भी और वे सच्चाइयाँ भी, जो आज तक पूरी तरह सामने नहीं आ सकीं। 1. अंकिता भंडारी : एक साधारण लड़की, असाधारण साहसअंकिता भंडारी, उम्र लगभग 19 वर्ष, मूल निवासी डोभ-श्रीकोट, पौड़ी गढ़वाल।एक सामान्य परिवार की बेटी, जिसके सपने भी सामान्य थे — नौकरी करना परिवार को सहारा देना आत्मनिर्भर बननाइसी उम्मीद के साथ उसने ऋषिकेश के पास यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी स्वीकार की।अंकिता को शायद अंदाज़ा नहीं था कि यह नौकरी उसकी ज़िंदगी की आख़िरी मंज़िल बन जाएगी। 2. वनंतरा रिज़ॉर्ट : ऐशो-आराम के पीछे का अंधेरावनंतरा रिज़ॉर्ट बाहर से जितना भव्य था, भीतर उतना ही विवादित।इसका मालिक पुलकित आर्य था —जो केवल एक कारोबारी नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख से जुड़ा नाम था।पूर्व कर्मचारियों और जांच में सामने आया कि:रिज़ॉर्ट में देर रात तक गतिविधियाँशराब और नशे का प्रचलन“ख़ास मेहमानों” के लिए विशेष इंतज़ामयह सब सामान्य होटल संस्कृति से अलग था और यहीं से शक की बुनियाद पड़ी। 3. “स्पेशल सर्विस” : वही शब्द जिसने हत्या की वजह बताईजांच में जो सबसे गंभीर तथ्य सामने आया, वह था “स्पेशल सर्विस”।सूत्रों और चार्जशीट के अनुसार:अंकिता पर दबाव बनाया गयाकुछ VIP मेहमानों को “ख़ुश” करने को कहा गयाइशारों में अनैतिक सेवाओं की बात कही गई अंकिता ने इसका विरोध किया उसने साफ शब्दों में मना किया यही मना करना उसके लिए जानलेवा साबित हुआयह बिंदु इस पूरे केस की सबसे संवेदनशील और विवादित कड़ी है। 4. 18 सितंबर 2022 : जब अंकिता ग़ायब हुई18 सितंबर की रात अंकिता अचानक लापता हो जाती है।रिज़ॉर्ट प्रबंधन का रवैया शुरू से ही संदिग्ध रहा। न तुरंत पुलिस को सूचना न परिवार को गंभीरता से बताया न CCTV फुटेज सार्वजनिकपरिवार ने जब दबाव बनाया, तब गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई —और यहीं से पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे। 5. हत्या की रात : जो जांच में सामने आयाSIT जांच में स्पष्ट हुआ कि:अंकिता को पहले डराया-धमकाया गयाफिर शारीरिक हिंसा हुईअंततः उसकी हत्या कर दी गईहत्या के बाद:शव को चिल्ला नहर में फेंका गयाताकि सबूत न मिल सकेंऔर मामला “गुमशुदगी” बनकर दब जाए24 सितंबर को जब शव मिला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 6. जनता का विस्फोट और प्रशासन की हड़बड़ीशव मिलने के बाद:पूरा उत्तराखंड सड़कों पर उतर आयासरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगेप्रशासन ने जल्दबाज़ी में: वनंतरा रिज़ॉर्ट पर बुलडोज़र चलवा दियायहीं से एक नया सवाल खड़ा हुआ: ❓ क्या यह न्याय था या सबूत मिटाने की प्रक्रिया? 7. आरोपी और आरोपतीन लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया:पुलकित आर्य – मालिकसौरभ भास्कर – मैनेजरअंकित गुप्ता – सहायक मैनेजरइन पर:हत्यासाजिशसबूत मिटानेजैसी गंभीर धाराएँ लगाई गईं। 8. SIT जांच : मजबूत लेकिन अधूरी?SIT ने:500+ पन्नों की चार्जशीट90 से अधिक गवाहतकनीकी और फॉरेंसिक सबूतकोर्ट में पेश किए।लेकिन: VIP का नाम सामने नहीं आया कई सवाल अनुत्तरित रहेराजनीतिक दबाव की आशंका बनी रही9. VIP एंगल : सबसे बड़ा अधूरा सचयही वह बिंदु है जिसने इस केस को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया।परिवार का आरोप: “असल ताक़तवर लोग बच गए”CBI जांच की मांगराष्ट्रपति को ज्ञापनउत्तराखंड बंदसब इसी सवाल पर टिके रहे — VIP कौन था? 10. कोर्ट का फैसला : सज़ा तो मिली, संतोष नहीं30 मई 2025कोटद्वार सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।अदालत ने माना:हत्या सुनियोजित थीअंकिता ने गलत के आगे झुकने से इनकार कियालेकिन समाज आज भी पूछ रहा है: ❓ क्या पूरा सच सामने आया? निष्कर्ष : अंकिता एक नाम नहीं, एक सवाल हैअंकिता भंडारी अब नहीं है,लेकिन उसका सवाल आज भी ज़िंदा है —अगर एक लड़की “ना” कह दे,तो क्या सिस्टम उसकी रक्षा करेगाया उसे मिटा देगा?

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